चित्र या लेख, ज़्यादा प्रभाव किसका?

जौनपुर

 30-07-2018 03:04 PM
ध्वनि 2- भाषायें

दुनिया की सबसे ज़्यादा प्रसिद्ध तस्वीरों में से एक ताज महल की तस्वीर है। जिसने इसे प्रत्‍यक्ष रूप से नहीं देखा है, उसने अपने जीवन में एक बार उसकी तस्‍वीर को तो जरुर देखा होगा। लेकिन यह दिलचस्प बात है कि जो लोग आगरा गए हैं और वास्तव में इस स्मारक को देख चुके हैं, उन्होंने केवल उसके आकार, रंग और आसपास के इलाकों को याद रखा है। शायद ही कोई उस पर लिखे गए शब्दों पर ध्यान देता है। वास्तव में दीवारों और ताज महल के गुंबदों पर लिखे गए कुरान के 14 पूर्ण अध्यायों सहित बीस गद्यांश हैं। अमानत खां, सम्राट शाहजहां द्वारा चुने गए हस्‍तलिपिक थे, जो ताजमहल की शिलाओं पर कुरान की आयातें लिखने के लिए भारत आये थे। उनकी लेखन शैली थुलुथ थी, जिसका शाब्दिक अर्थ अरबी में एक-तिहाई है। यह हस्तलिपि कुफिक (सबसे पुरानी हस्तलिपि में से एक) से ली गयी थी तथा प्रस्तुत चित्र में इसे दर्शाया गया है।

ऐसी ही जौनपुर में गोमती के दाहिने किनारे पर स्थित झांझरी मस्जिद है, जिसकी सुंदरता ऐसी है कि कोई भी इसे देखे बिना यहां से नहीं जाता। इस पर किए गये अलंकृत कार्य के कारण इस मस्जिद को झांझरी नाम दिया गया था। झांझरी मस्जिद भारतीय पुरातात्विक विभाग (Archaeological Survey of India) की देखभाल में एक संरक्षित स्थल है, तथा इसकी सुंदरता तथा भव्यता में जौनपुर के गौरवशाली ऐतिहासिक महत्व की झलक देखने को मिलती है।

इसको इब्राहिम शाह शर्की ने अटाला तथा खालिस मुख्लिस मस्जिद के समय में बनवाया था। उन्होनें इसका निर्माण हजरत साद के सम्मान में करवाया था। परंतु इसे सिकंदर लोदी ने ध्वस्त कर दिया था, फिर भी इसका एक हिस्सा बच गया जिस पर अरबी में तुघरा शैली में शिलालेखों पर अलंकरण की सजावट भी है। घुमावदार किनारों में तुघरा अक्षरों की ऊंचाई लगभग 30 से.मी. है तथा आधार की तरफ ये और भी बड़े हैं, जो हस्‍तलिपिक शिलालेखों की एक क्षैतिज पट्टी है तथा मेहराब के सिरों से मिलती है। इन घुमावदार किनारों के शिलालेखों में कुरान के सूरा- II द्वारा लिखित पद्य हैं। क्षैतिज पट्टी में हदीस उद्धरण है। झांझरी मस्जिद के इस शिलालेख को नीचे दिए गए चित्र में दर्शाया गया है।

हम ताज महल की हस्‍तलिपी को देखकर भी अनदेखा कर देते हैं, फिर जौनपुर की झांझरी मस्जिद, जिसका नाम कम लोग जानते हैं, पर अंकित महत्वपूर्ण शब्दों के विषय में तो और कम जिज्ञासा होगी।

और तो और, हम फेसबुक (Facebook), इंस्टाग्राम (Instagram) तथा अन्य सोशल मीडिया फीड (Social Media Feed) में ताज महल जैसी विरासत की सुंदर तस्वीरों को देखते तो है परंतु इसकी सुंदरता से जुड़े जो लेख हैं, उन महत्वपूर्ण तथ्यों को स्मरण में नहीं रखते हैं। इंटरनेट (Internet) पर विभिन्न विषय की तस्वीरों के साथ भी वही होता है। यदि प्रसिद्ध इमारतों के दर्शन करके उन पर लिखी इस विशेष जानकारी को इतनी आसानी से भुलाया जा सकता है, तो क्या हम वास्तव में सोशल मीडिया पर पढ़ने वाली बहुसंख्यक और विविश लिखित जानकारी के विशाल भण्‍डार पर ध्यान दे सकते हैं, या उसको याद कर सकते हैं?

संदर्भ:
1. http://uttarpradesh.gov.in/en/details/jhanjhari-mosque/330036003300
2. http://thetajmahal.co.in/art-and-architecture/calligraphy/?print=print
3. अंग्रेज़ी निबंध: Abbas, Syed Anwer. 15th Century Calligraphy Framing in Jhanjhiri Masjid, Jaunpur, UP [https://www.academia.edu/12291208/15th_C_calligraphic_framing_in_Jhanjhiri_Masjid_Jaunpur_U.P._India)



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