क्या है ये वर्चुअल रियलिटी और क्यों हैं सब इसके दीवाने?

जौनपुर

 29-06-2018 02:34 PM
संचार एवं संचार यन्त्र

जिस प्रकार से पृथ्वी में सतत बदलाव की प्रक्रिया पायी जाती है ठीक उसी प्रकार से तकनीकी में भी कई बदलाव आते रहते हैं। इसी तकनीकी में से प्रदर्शन तकनीकी भी एक है। यदि प्रदर्शन की बात की जाये तो ये पाषाण काल तक जाता है जब मनुष्य गुफाओं में चित्र बनाया करता था। समय के साथ-साथ इस तकनीकी में बदलाव आया और मनुष्य ने टेलीविज़न (Television) पर चल चित्रों को देखना शुरू किया। इस तकनीकी में एक अभूतपूर्व बदलाव तब आया जब सिनेमाघरों से लेकर मोबाइल पर भी चल चित्र देखना अत्यंत सुगम हो गया। मोबाइल में इस तकनीकी के आ जाने से कई अन्य तकनीकों का उदय हुआ जिनसे चलचित्र देखने की परंपरा में कई बदलाव आये।

इन्हीं बदलावों का फल है कि आभासी वास्तविकता जैसी तकनीकियों का जन्म हुआ। इससे पहले 3डी और 4डी तकनीकों का उदय हो चुका था। जैसा कि हम जानते हैं, 3डी तकनीकी में एक चश्मा लगाया जाता है जिसके बाद एक आभासी जीवन हमारे सामने तैयार हो जाता है जहाँ पर हम सभी किरदारों आदि को अपने आँख के सामने वास्तव में चलता फिरता महसूस करते हैं। यह तकनीक सिनेमाघरों से निकलकर हमारे घरों के टेलीविज़न सेटों तक आ पहुँची और बाजार में 3 डी टेलीविज़न की भरमार आ गई। विगत कुछ वर्षों से आभासी वास्तविकता तकनीकी ने दुनिया भर में बड़े पैमाने पर प्रसार किया और इसका ही फल है कि कई राजनैतिक पार्टियों ने भी अपने प्रचार के लिए इस तकनीकी का प्रयोग करना शुरू कर दिया। 2014 के चुनाव में भाजपा ने प्रचार और प्रसार करने के लिए इस तकनीकी का सहारा लिया।

आइये जानते हैं कि आखिर आभासी वास्तविकता या वर्चुअल रियलिटी (Virtual Reality) है क्या? जैसा कि हम जानते हैं कि 3डी तकनीकी को आभासी तकनीकी की संज्ञा दी जाती है। आभासी वास्तविकता वह तकनीकी है जो आपके सामने ऐसी तस्वीर पेश करती है जो कि एकदम ऐसा प्रतीत होती है कि जैसे यह घटना आपके सामने घटित हो रही हो। यह मनुष्य की इन्द्रियों पर ऐसी तस्वीर डालती है जो कि सभी को यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि जो भी घटना घटित हो रही है वह हमारे आस-पास ही घटित हो रही है। मनुष्य अपने आपको इस तकनीकी से यह महसूस कराता है कि वह खुद भी दिखाए गए घटनाक्रम का एक हिस्सा है। हम जो कुछ भी वास्तविकता के बारे में जानते हैं वह हमारी इन्द्रियों द्वारा प्रेषित किया जाता है। ऐसे में हम यह कह सकते हैं कि आभासी वास्तविकता भी हमें वही चित्र प्रस्तुत करती है। वर्तमान काल में एक चश्मा भी आ गया है जो कि मोबाइल या अन्य वाई-फाई (Wi-Fi) से चलने वाले यंत्र से जुड़ जाता है और हमें आँख के सामने आभासी प्रतिबिम्ब की संरचना कराके दुनिया की सैर कराता है। आजकल कई खेल भी इस तकनीकी से खेले जाते हैं जिससे मानव यह समझता है कि वह उस खेल का एक हिस्सा है।

संदर्भ:
1.https://www.explainthatstuff.com/virtualreality.html
2.https://www.vrs.org.uk/virtual-reality/what-is-virtual-reality.html
3.https://www.telegraph.co.uk/news/worldnews/asia/india/10803961/Magic-Modi-uses-hologram-to-address-dozens-of-rallies-at-once.html



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