Post Viewership from Post Date to 01-Sep-2024
City Subscribers (FB+App) Website (Direct+Google) Email Instagram Total
2430 116 2546

***Scroll down to the bottom of the page for above post viewership metric definitions

देवी आइसिस व देवी सेशत को क्यों माना जाता है, मिस्र की सबसे शक्तिशाली देवियां?

जौनपुर

 27-08-2024 09:06 AM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)
माना जाता है कि, भारतीय पौराणिक कथाओं के सप्तर्षियों में से एक – ऋषि जमदग्नि, जौनपुर क्षेत्र के जंगलों में रहते थे। साथ ही, उन्होंने इस स्थान को अपनी तपस्थली के रूप में इस्तेमाल किया था। कई किंवदंतियों के अनुसार, इन ऋषियों को, देवताओं से प्राप्त पवित्र ज्ञान को संरक्षित करने का काम सौंपा गया था। सप्तर्षियों को अक्सर ही, बुद्धिमान मनुष्यों के रूप में चित्रित किया जाता है, जिन्होंने मानवता को ज्ञान और मार्गदर्शन प्रदान किया है। तत्कालीन भारतीय सभ्यता के समान ही, प्राचीन मिस्रवासी भी, कई अलग-अलग देवी-देवताओं में विश्वास करते थे। वहां भी शांति और सद्भाव बनाए रखने में, प्रत्येक देवी-देवताओं की अपनी-अपनी भूमिका थी। कुछ शोधकर्ताओं के अनुसार, देवी आइसिस(Isis) को मिस्र की सबसे शक्तिशाली देवी माना जाता था। दूसरी ओर, ज्ञान की देवी सेशत(Seshat) को लेखन के आविष्कारक के रूप में श्रेय दिया गया है। तो चलिए, आज मिस्र की इन देवियों के बारे में विस्तार से बात करते हैं। हम उनकी पृष्ठभूमि और पौराणिक महत्व पर चर्चा करेंगे। इसके बाद, हम प्राचीन मिस्र की कुछ महत्वपूर्ण देवियों के बारे में भी बात करेंगे।
आइसिस, प्राचीन मिस्र धर्म की सबसे शक्तिशाली देवी थीं । “आइसिस” यह नाम, मिस्र के एक शब्द – ‘एसेट(Aset)’ या ) एक ग्रीक शब्द एसेट(Eset) से लिया गया है। मोटे तौर पर, इसका अनुवाद “सिंहासन” या “सिंहासन की रानी” होता है। इस प्रकार, आइसिस मिस्र की रानी थीं, और अपने पति और भाई ओसिरिस(Osiris) के साथ शासन करती थीं । और ओसिरिस, दोनों ही मिस्र के देवी देवता थे, जो हेलियोपोलिस(Heliopolis) के एननेड(Ennead) से संबंधित थे।
आइसिस, प्राचीन अनुयायियों के लिए, प्रत्येक सकारात्मक स्त्री गुण का प्रतिनिधित्व करती थीं । इन अनुयायी देवी को म्यान पोशाक और साफ़ा पहने हुए, एक खूबसूरत महिला के रूप में दिखाया गया है । आइसिस को अक्सर ही, अपने सिर पर, एक चक्र या सिंहासन के साथ चित्रित किया जाता है । देवी के साफ़े में, एक गिद्ध या किनारे पर, सींगों वाला एक चक्र भी होता है। एक तरफ़, मिस्र की कुछ कलाकृतियां, आइसिस को शाही वस्त्र पहने हुए, पंखों वाली देवी के रूप में दिखाती हैं।
आइसिस का पहला संदर्भ, 2350-2100 ईसा पूर्व के, पिरामिड ग्रंथों (Pyramid Texts) में मिलता है। ये ग्रंथ, किसी मृत राजा या रानी की रक्षा के लिए, इस्तेमाल की जाने वाली प्रार्थनाओं, मंत्रों और भजनों का संग्रह हैं । एक पत्नी के रूप में, अपने खोए हुए पति की तलाश करने ; एक लापता बच्चे का शोक मनाने और अपने परिवार के लिए लड़ने की उनकी कहानियों ने, उन्हें मिस्र के आम लोगों में लोकप्रिय बना दिया। इस प्रकार, वे पुरुष और महिला, शाही और आम, सभी लोगों की देवी बन गईं।
दूसरी तरफ़, सेशत, लेखन, बुद्धि और ज्ञान से संबंधित, मिस्र की देवी थीं। वे थोथ(Thoth) की बेटी थीं। उन्हें एक मुंशी और अभिलेखपाल के रूप में देखा जाता था। दरअसल, उनके नाम का अर्थ ही, “महिला मुंशी” है। साथ ही, उन्हें लेखन का आविष्कार करने का भी श्रेय दिया जाता है। इसके अलावा, उन्हें विज्ञान, लेखांकन, वास्तुकला, खगोल विज्ञान, ज्योतिष, भवन निर्माण, गणित और सर्वेक्षण की देवी के रूप में भी पहचाना जाने लगा।
आइए, अब प्राचीन मिस्र की, कुछ सबसे महत्वपूर्ण देवियों के बारे में जानते हैं।
1.) अमुनेट (Amunet): देवी अमुनेट के नाम का अर्थ – अदृश्य, है। उन्हें अक्सर ही, ऊंचे पंखों का मुकुट पहने हुए, या कभी-कभी, सांप के सिर वाली महिला के रूप में चित्रित किया गया था। रहस्य की देवी के रूप में, अमुनेट, रहस्यों, छिपे हुए ज्ञान और अनदेखी दुनिया से जुड़ी थीं । माना जाता था कि, उनके पास लोगों को नुकसान से बचाने की शक्ति थी, और अक्सर ही, सुरक्षा और उपचार के अनुष्ठानों और समारोहों में, अमुनेट का आह्वान किया जाता था। वे भगवान अमुन(Amun) के साथ निकटता से जुड़ी हुई थीं । माना जाता था कि, वे उनकी पत्नी थीं । साथ ही, उन्होंने छिपी हुई शक्ति की अवधारणा और दुनिया को बनाने एवं बदलने की क्षमता का भी प्रतिनिधित्व किया।
2.) अनुकेत (Anuket): अनुकेत देवी के नाम का अर्थ – “सबको अपनाने वाली” है। अक्सर ही, उन्हें लंबा व पंखदार साफ़ा पहने; एक छड़ी पकड़े हुए; और कभी-कभी एक सुंदर हिरन के सिर के साथ, एक महिला के रूप में चित्रित किया गया था। नील नदी की देवी के रूप में, अनुकेत जल, उर्वरता और समृद्धि से जुड़ी थीं। माना जाता था कि, उनके पास भूमि में उर्वरता लाने की शक्ति थी, और उन्हें अक्सर ही, नील नदी और उसकी वार्षिक बाढ़ को समर्पित त्योहारों और समारोहों में सम्मानित किया जाता था। अनुकेत का भगवान खानुम(Khnum) से गहरा संबंध था, जिन्हें नील नदी का निर्माता माना जाता था। साथ ही, उन्होंने नदी की जीवनदायी शक्ति और जीवन के पोषण को बनाए रखने की क्षमता का प्रतिनिधित्व किया।
3.) सेखमेट(Sekhmet): योद्धा देवी सेखमेट का सिर, शेरनी का था और वे खून से लाल रंग में चित्रित थीं । वे विनाश और महामारी की देवी थीं, जिन्हें उनके पिता रा(Ra) ने, किसी कारण, मनुष्यों को दंडित करने के लिए भेजा था। मिस्र के संतुलन के विषय को ध्यान में रखते हुए, सेखमेट महामारी का इलाज भी कर सकती थीं, और रेगिस्तानी हवाओं को भी रोक सकती थीं । उन्होनें प्राचीन शासक – फ़िरौन (Pharaohs) की रक्षा करने में भी मदद की। सेखमेट की चित्रलिपि और मूर्तियों में, उनके सिर के ऊपर, सूर्य चक्र दिखाई देता था।
4.) मात(Ma’at): मात, सद्भाव, संतुलन, न्याय और सच्चाई की देवी थीं । उन्होंने मिस्र के फ़िरौन को बुद्धिमानी से शासन करने, और लोगों को संतुलन और सद्भाव के नियमों के अनुसार रहने के लिए, निर्देशित किया। उन्हें अक्सर ही, अपने बालों में शुतुरमुर्ग के पंख लगाए हुए, एक मुकुटधारी महिला के रूप में चित्रित किया जाता है । देवी मात, ऋतुओं को नियंत्रित करती थीं, और सितारों, चंद्रमा और अराजकता से व्यवस्था बनाने के लिए ज़िम्मेदार थीं । जब एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती थी, तो, उन्हें ‘सत्य के कक्ष’ में ले जाया जाता था, जहां मात, उनके दिल को एक पंख से तौलती थी। यदि, मृत व्यक्ति का हृदय और पंख संतुलित होते, तो, मृत व्यक्ति का पाताल लोक में स्वागत किया जा सकता था।
5.) नेफ़थिस (Nephthys): नेफ़थिस के पास, कई ज़िम्मेदारियाँ थीं। इनमें, रात्रि की देवी, शोक, प्रसव, नदियां और घर आदि प्रतीक शामिल थे। कला में, नेफ़थिस को, अक्सर एक महिला के रूप में प्रदर्शित किया जाता है, जिनके सिर पर घर का साफ़ा होता है। साथ ही, वे सेट(Set) की पत्नी, और अनुबिस(Anubis) की मां थीं ।
6.) तावेरेट(Taweret): तावेरेट, प्रसव, प्रजनन क्षमता (नया जीवन) और सुरक्षा की देवी थीं । इन्हें अक्सर ही, मातृत्व और परिवार से जोड़ा जाता है। इस प्रकार, तावेरेट को, एक गर्भवती महिला के पेट और स्तनों के साथ खड़े, दरियाई घोड़े के रूप में चित्रित किया जाता है। ये देवी, बच्चों की सुरक्षा से भी निकटता से जुड़ी हुई हैं । इस कारण, बच्चों को खतरे से बचाने और उनके स्वास्थ्य और कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए, फ़र्नीचर और घरेलू वस्तुओं पर उनको चित्रित किया जाता था। वर्तमान में मौजूद तावीज़ और उनकी अन्य छवियों की संख्या के आधार पर, वह सबसे लोकप्रिय घरेलू देवताओं में से एक थीं। वह मिस्र के बाहर भी एक लोकप्रिय देवी बन गईं, और पूर्वी भूमध्यसागरीय और पश्चिमी एशिया के कुछ हिस्सों में भी मातृ देवी के रूप में लोकप्रिय हो गईं ।

संदर्भ
https://tinyurl.com/28dyy4v3
https://tinyurl.com/3rnnwwvv
https://tinyurl.com/yc6vneha
https://tinyurl.com/yy97bphs
https://tinyurl.com/c2a76uhw

चित्र संदर्भ

1. देवी आइसिस व देवी सेशत को संदर्भित करता एक चित्रण (wikimedia)
2. देवी आइसिस को संदर्भित करता एक चित्रण (wikimedia)
3. देवी सेशत को संदर्भित करता एक चित्रण (wikimedia)
4. देवी अमुनेट को संदर्भित करता एक चित्रण (wikimedia)
5. देवी अनुकेत को संदर्भित करता एक चित्रण (wikimedia)
6. देवी सेखमेट को संदर्भित करता एक चित्रण (wikimedia)
7. देवी मात को संदर्भित करता एक चित्रण (wikimedia)
8. देवी नेफ़थिस को संदर्भित करता एक चित्रण (wikimedia)
9. देवी तावेरेट को संदर्भित करता एक चित्रण (wikimedia)


***Definitions of the post viewership metrics on top of the page:
A. City Subscribers (FB + App) -This is the Total city-based unique subscribers from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App who reached this specific post. Do note that any Prarang subscribers who visited this post from outside (Pin-Code range) the city OR did not login to their Facebook account during this time, are NOT included in this total.
B. Website (Google + Direct) -This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.
C. Total Viewership —This is the Sum of all Subscribers(FB+App), Website(Google+Direct), Email and Instagram who reached this Prarang post/page.
D. The Reach (Viewership) on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion ( Day 31 or 32) of One Month from the day of posting. The numbers displayed are indicative of the cumulative count of each metric at the end of 5 DAYS or a FULL MONTH, from the day of Posting to respective hyper-local Prarang subscribers, in the city.

RECENT POST

  • जौनपुर शहर की नींव, गोमती और शारदा जैसी नदियों पर टिकी हुई है!
    नदियाँ

     18-09-2024 09:14 AM


  • रंग वर्णकों से मिलता है फूलों को अपने विकास एवं अस्तित्व के लिए, विशिष्ट रंग
    कोशिका के आधार पर

     17-09-2024 09:11 AM


  • क्या हैं हमारे पड़ोसी लाल ग्रह, मंगल पर, जीवन की संभावनाएँ और इससे जुड़ी चुनौतियाँ ?
    मरुस्थल

     16-09-2024 09:30 AM


  • आइए, जानें महासागरों के बारे में कुछ रोचक बातें
    समुद्र

     15-09-2024 09:22 AM


  • इस हिंदी दिवस पर, जानें हिंदी पर आधारित पहली प्रोग्रामिंग भाषा, कलाम के बारे में
    संचार एवं संचार यन्त्र

     14-09-2024 09:17 AM


  • जौनपुर में बिकने वाले उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है बी आई एस
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     13-09-2024 09:05 AM


  • जानें कैसे, अम्लीय वर्षा, ताज महल की सुंदरता को कम कर रही है
    जलवायु व ऋतु

     12-09-2024 09:10 AM


  • सुगंध नोट्स, इनके उपपरिवारों और सुगंध चक्र के बारे में जानकर, सही परफ़्यूम का चयन करें
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     11-09-2024 09:12 AM


  • मध्यकाल में, जौनपुर ज़िले में स्थित, ज़फ़राबाद के कागज़ ने हासिल की अपार प्रसिद्धि
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     10-09-2024 09:27 AM


  • पृथ्वी पर सबसे दुर्लभ खनिजों में से एक है ब्लू जॉन
    खनिज

     09-09-2024 09:34 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id