छद्म-वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति होने के बावजूद लोकप्रिय हो रही है, होम्योपैथी

विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा
24-01-2023 11:24 AM
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छद्म-वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति होने के बावजूद लोकप्रिय हो रही है, होम्योपैथी

होम्योपैथिक उपचार को कई बार इसके नाम के कारण “किसी बीमारी के घरेलू उपचार" के तौर पर संदर्भित कर दिया जाता है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है बल्कि कई अन्य सफल चिकित्सा पद्धतियों की भांति ही होम्योपैथी (Homeopathy) भी एक विस्तृत किंतु छद्म-वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति है।
होम्योपैथी “सम: समम् शमयति” अर्थात “समरूपता दवा सिद्धांत” पर आधारित एक चिकित्सा प्रणाली मानी जाती है, जो वास्तव में दवाओं द्वारा रोगी का उपचार करने की एक ऐसी विधि है, जिसके अंतर्गत यह धारणा है कि एक पदार्थ से, जो किसी स्वस्थ व्यक्ति में प्राकृतिक रोग का अनुरूपण करके समान लक्षण उत्पन्न कर सकता है, उसी पदार्थ से रोग ग्रस्त व्यक्ति का उपचार भी किया जा सकता है। इस पद्धति में रोगियों का उपचार समग्र दृष्टिकोण के साथ-साथ उसकी व्यक्तिगत विशेषताओं को समझ कर भी किया जाता है। होम्योपैथी की अवधारणा पहली बार जर्मनी में 1796 में सैमुअल हैनिमैन (Samuel Hahnemann) द्वारा उनके “एक जैसे इलाज (Like Cure Like)" सिद्धांत के आधार पर की गई थी । जैसा की हमने अभी ऊपर पढ़ा, यह सिद्धांत बताता है कि एक पदार्थ, जो एक स्वस्थ व्यक्ति में रोग के समान लक्षण पैदा करता है, वही पदार्थ बीमार व्यक्ति में समान लक्षणों को ठीक कर सकता है। इसके पीछे तर्क यह दिया जाता है कि खुराक जितनी छोटी होगी, बीमारी को दूर करने के लिए शरीर की “महत्वपूर्ण शक्ति" को उत्तेजित करने में यह उतनी ही अधिक प्रभावी होगी । हालाँकि, यह सिद्धांत वैज्ञानिक प्रमाणों द्वारा समर्थित नहीं है, इसलिए होम्योपैथी को छद्म विज्ञान (Pseudoscience) माना जाता है। होम्योपैथी के अभ्यास ने जर्मनी में लोकप्रियता हासिल की और इसके न्यूनतम दुष्प्रभावों और इलाज की उपाख्यानात्मक कहानियों के कारण इसका विस्तार यूरोप और भारत में बड़ी तेज़ी और व्यापक रूप से हो गया।
भारत में, इसे आयुर्वेद के रूप में एक प्राकृतिक पूरक मिला और इतिहास में कई शासकों द्वारा इसे अपनाया गया, बाद में पूरे देश में इसे व्यापक रूप से अपनाया गया। भारत में पहला होम्योपैथिक कॉलेज 1881 में खोला गया था और तब से पूरे देश में इसी तरह के अनेकों होम्योपैथिक कॉलेज खोले गए । भारत सरकार भी स्वतंत्रता के बाद से होम्योपैथी को संरक्षण प्रदान कर रही है । जबकि मुख्यधारा की चिकित्सा जैसे चेचक के टीके की शुरुआत और संज्ञाहरण की स्थापना ने इस अवधि के दौरान होम्योपैथी की प्रगति में अहम् योगदान दिया। आज दुनिया भर में बहुत से लोग होम्योपैथिक उत्पादों का उपयोग करते हैं क्योंकि इन उत्पादों का उपयोग सुरक्षित माना जाता है। हालांकि, मैकगिल विश्वविद्यालय (McGill Universit)y द्वारा संचालित ‘विज्ञान और समाज के कार्यालय’ (The Office for Science and Society (OSS) का मानना है कि होम्योपैथी का प्रचार ऐसे सिद्धांतों पर आधारित है जिसे रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान या भौतिकी के स्थापित कानूनों द्वारा समर्थित नहीं किया जा सकता है, एवं जिनके कारण यह चिकित्सा प्रणाली पैसे की अनावश्यक बर्बादी का कारण बनती हैं। दुनिया भर में, 200 मिलियन से अधिक लोग नियमित रूप से होम्योपैथी का उपयोग करते हैं। होम्योपैथी कई देशों जैसे कि ब्राजील (Brazil), चिली (Chille), भारत, मेक्सिको (Mexico), पाकिस्तान, स्विट्जरलैंड (Switzerland), की राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में भी शामिल है।
होम्योपैथी का उपयोग करने वाले लोगों की संख्या के मामले में भारत सबसे आगे है, यहां पर 100 मिलियन लोग अपनी चिकित्सा देखभाल के लिए पूरी तरह से होम्योपैथी पर निर्भर हैं। भारत में वर्तमान में 200,000 से अधिक पंजीकृत होम्योपैथिक डॉक्टर हैं, जिनमें हर साल लगभग 12,000 डॉक्टर और जुड़ रहे हैं। भारत में, कई व्यक्तियों की आधुनिक स्वास्थ्य सेवा तक सीमित पहुंच है, और सरकार द्वारा भी भारत की विशाल जनसंख्या को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के अनुरूप पर्याप्त धन आवंटित नहीं किया जाता है । स्वास्थ्य सेवा वितरण में इस अंतर को भरने के लिए ‘होम्योपैथ' (होम्योपैथिक चिकित्सक) आगे आते हैं। यूरोपीय संघ की लगभग 29%,आबादी, जो लगभग 100 मिलियन के आसपास है, अपनी दैनिक स्वास्थ्य देखभाल में होम्योपैथिक दवाओं का उपयोग करती हैं। 42 यूरोपीय देशों में से 40 देशों में होम्योपैथी का अभ्यास किया जाता है। यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) में 10% (अनुमानित 6 मिलियन) लोग होम्योपैथी का उपयोग करते हैं। ब्रिटेन में होम्योपैथी का बाजार प्रति वर्ष लगभग 20% की दर से बढ़ रहा है। 2007 में, इसका मूल्य £38m होने का अनुमान लगाया गया था, और 2012 में इसके £46m तक पहुंचने का अनुमान था यूके (UK) में 1,500 पेशेवर होम्योपैथ (गैर-चिकित्सकीय रूप से योग्य होम्योपैथ) हैं।
वहीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) में 6 मिलियन से अधिक लोग मुख्य रूप से विशिष्ट स्वास्थ्य स्थितियों की स्वयं की देखभाल के लिए होम्योपैथी का उपयोग करते हैं। । संयुक्त राज्य अमेरिका में होम्योपैथी का उपयोग करने वालों में 1 मिलियन बच्चे और 5 मिलियन से अधिक वयस्क शामिल हैं। होम्योपैथी जर्मनी (Germany), फ्रांस (France) और नीदरलैंड (Netherland) में भी लोकप्रिय है, । हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये विचार और होम्योपैथी की प्रभावशीलता वैज्ञानिक प्रमाणों द्वारा समर्थित नहीं हैं, साथ ही होम्योपैथी, हर्बल दवाओं, एक्यूपंक्चर (Acupuncture) या रिफ्लेक्सोलॉजी (Reflexology) का विकल्प अथवा पूरक भी नहीं है।

संदर्भ
https://bit.ly/3wjXmdU
https://bit.ly/3wkc2tF
https://bloom.bg/3DtwYmb
https://bit.ly/3D4TVM9

चित्र संदर्भ

1. होम्योपैथी चिकित्सा को संदर्भित करता एक चित्रण (wikimedia)
2. होम्योपैथी दवाओं को संदर्भित करता एक चित्रण (wikimedia)
3. होम्योपैथिक फार्मेसी वाराणसी बनारस को संदर्भित करता एक चित्रण (wikimedia)
4. नैमिनाथ होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, आगरा को संदर्भित करता एक चित्रण (naiminath)
5. होम्योपैथी दवाओं को संदर्भित करता एक चित्रण (wikimedia)

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