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कोरोनावायरस (Coronavirus) संवेदनशील जगह को लक्षित करने, संक्रमण के प्रसार को धीमा करने और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को फिर से खोलने के वैश्विक प्रयास के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में संपर्क अनुरेखण का अनुसरण किया जा रहा है। वहीं अधिकांश विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि वास्तव में इस बीमारी को रोकने के लिए, यह अधिक व्यापक परीक्षण और अंततः एक प्रभावी तरीका होगा। यदि ध्यानपूर्वक मानव रोग रोगवाहक के संचालन के प्रतिरूप का पालन करके अधिकार क्षेत्रों को उम्मीद है कि वे उन लोगों पर अपने लॉकडाउन (Lockdown) उपायों को लक्षित करने में सक्षम होंगे जो इस महामारी से संक्रमित होने में सबसे अधिक जोखिम में हैं, इससे सामान्य जीवन फिर से शुरू हो सकता है। संपर्क अन्वेषक शहर और राज्य के स्वास्थ्य विभागों द्वारा प्राप्त परीक्षण परिणामों के आधार पर संक्रमित व्यक्तियों की पहचान करते हैं। फिर वे उचित दूरी बनाए रखते हुए फ़ोन के माध्यम से संक्रमित व्यक्तियों से उनके संपर्क में आए लोगों के नामों को याद करने के लिए बोलते हैं। अंत में, संपर्क अन्वेषक संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आए लोगों को उनके संभावित जोखिम से आगाह करते हैं। इसके बाद वे उन्हें अलग एक कमरे में रहने की सलाह देते हैं और उन्हें प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए आवश्यक संसाधनों को प्रदान करते हैं।
वहीं संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने में ऐप्स (Apps) भी मदद कर सकते हैं। एप्पल और गूगल ने सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठनों को उपकरण उपलब्ध करवाए हैं ताकि वे संपर्क अनुरेखण ऐप विकसित कर सकें जो कोरोनावायरस संक्रमित व्यक्तियों को अपने रोग-निदान विवरण को अभिलेख करने और संक्रमित व्यक्तियों के बार में अन्य ऐप उपयोगकर्ताओं को सचेत करने के लिए ब्लूटूथ (Bluetooth) तकनीक का उपयोग करने की अनुमति देते हैं। लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि प्रौद्योगिकी मानव संपर्क अनुरेखण को प्रतिस्थापित नहीं कर सकती है, जो लंबे साक्षात्कारों का संचालन करते हैं और असंख्य प्रकार के कार्य करते हैं और संपूर्ण रूप से जासूस की भांति जानकारी एकत्र करते हैं।
दुनिया भर के अधिकांश देश जहां कोरोनावायरस के प्रसार का पता लगाने के लिए ऐप बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं नई दिल्ली का आरोग्य सेतु नामक संपर्क अनुरेखण ऐप के जारी होने के 41 दिनों में भारत के 450 मिलियन स्मार्टफोन (Smartphone) उपयोगकर्ताओं में से 100 मिलियन उपयोगकर्ताओं द्वारा डाउनलोड (Download) किया गया। एंड्रॉइड (Android) और आईओएस (iOS) पर उपलब्ध ऐप, लोगों को स्व-मूल्यांकन करने की अनुमति देता है, जिसमें लोग कुछ सवालों के जवाब देकर कोरोनावायरस से संक्रमित होने या न होने की पुष्टि कर सकते हैं। यह इस सूचना का उपयोग उपयोगकर्ताओं को सचेत करने के लिए करता है, यदि वे किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आए हैं जो कोरोनावायरस से संक्रमित हो सकता है। (यह यूएसएसडी प्रणाली के माध्यम से वैशिष्टय-फोन उपयोगकर्ताओं के लिए भी उपलब्ध है।) लेकिन ऐप ने गोपनीयता अधिवक्ताओं और सुरक्षा शोधकर्ताओं के समक्ष चिंताएं बढ़ाई हैं। जब वे साइन अप (Sign up) करते हैं और बीमारी के लक्षणों का सामना करने वाले लोगों के विवरणों को छाँटते हैं, जिसके लिए ऐप उपयोगकर्ताओं का स्थान डेटा संग्रहीत करता है। साथ ही आरोग्य सेतु एक खुला स्रोत नहीं है, जिसका अर्थ है कि स्वतंत्र शोधकर्ता कोड का ऑडिट नहीं कर सकते हैं और इसकी किसी भी प्रकार की खामियों को नहीं खोज सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव के अनुसार सरकार ने आरोग्य सेतु के स्रोत कोड (Code) को सार्वजनिक नहीं किया है क्योंकि यह आशंका है कि कई लोग इसकी खामियों की ओर इशारा करेंगे, जिससे ऐप के विकास की देखरेख करने वाले कर्मचारियों पर अधिक बोझ डल जाएगा।
इसके अतिरिक्त, आरोग्य सेतु, जिसे एक स्वैच्छिक ऐप के रूप में लॉन्च किया गया था, अब सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के संगठनों के लिए काम फिर से शुरू करने और भारतीय रेलवे के साथ यात्रा करने वालों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा कहा गया है कि कोरोनोवायरस के खिलाफ लड़ाई में अस्पताल के बुनियादी ढांचे, आक्रामक संपर्क अनुरेखण और लोगों की मदद से लॉकडाउन के कुल प्रवर्तन मुख्य ध्यान केंद्र हैं।
हालांकि सार्वजनिक स्वास्थ्य में संपर्क अनुरेखण एक पुराना उपकरण है, जिसका उपयोग अक्सर क्षय, एचआईवी (HIV) और अन्य एसटीडीएस (STDs) के अपने संभावित जोखिम के मामलों को सचेत करने के लिए किया जाता है। लेकिन कोरोनावायरस महामारी का पैमाना और गति एक अभूतपूर्व चुनौती पेश करती है। इस महामारी की तेज़ गति को देखते हुए प्रत्येक संक्रमित व्यक्ति औसतन दो से तीन लोगों को संक्रमित कर सकता है। नेशनल एसोसिएशन ऑफ काउंटी एंड सिटी हेल्थ (National Association of County & City Health) के अधिकारियों ने अधिकार क्षेत्र में प्रति 1,00,000 लोगों पर 30 संपर्क अन्वेषकों या पूरे अमेरिका की आबादी के लिए कम से कम 1,00,000 अन्वेषकों को प्रसारित करने का सुझाव दिया है।
साथ ही जहां इस महामारी की वजह से ऐतिहासिक स्तर पर बेरोजगारी काफी बढ़ गई है, इस वर्ष की सबसे उत्तेजिक नौकरी संपर्क अनुरेखण की हो सकती है। कोरोनावायरस के चलते जहां धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था को खोला जा रहा है, वहीं संक्रमित व्यक्तियों और उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित हजारों लोगों की तत्काल आवश्यकता उत्पन्न हुई है। संयुक्त योजना की अनुपस्थिति में, कुछ शहर और राज्य स्वास्थ्य विभाग पहले से ही इन हजारों पदों को भरने के लिए खोज कर रहे हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि राज्य की आबादी और अनुमानित कोरोनवायरस संक्रमण दर के आधार पर उन्हें 1,00,000 और 3,00,000 संपर्क अन्वेषकों (जो प्रति वर्ष 65,000 डॉलर तक कमा सकते हैं) की राष्ट्रव्यापी आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अन्वेषक के पदों के लिए आवेदकों को स्वास्थ्य देखभाल में पृष्ठभूमि की आवश्यकता नहीं है, लेकिन मजबूत पारस्परिक कौशल और सहानुभूति की जरूरत है। कम से कम सार्वजनिक स्वास्थ्य में रुचि रखने का एक लंबा मार्ग तय होता है। कॉल सेंटर (Call center) के कर्मचारी अक्सर "रोग का पता लगाने वाले जासूस" के रूप में उच्च हो सकते हैं, क्योंकि उन्हें संपर्क के लक्षण भी ज्ञात होते हैं। आवेदकों में एक और वांछनीय विशेषता प्रेरक होने और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों को अलग रहने के लिए समझाने की क्षमता होनी चाहिए है। संक्रमण का पता लगाने का मूल कार्य अपेक्षाकृत सरल है, लेकिन लोगों को अलग रहने के लिए प्रेरित करना अधिक जटिल कार्य होता है। आधुनिक तकनीक कोरोनावायरस की लड़ाई में एक प्रभावी सहयोगी हो सकती है। अनुकूल और डिजिटल (Digital) रूप से चयन करने में सक्षम लोगों के लिए, ऐप्स का उपयोग रोगियों द्वारा दैनिक तापमान जांच के परिणामों को अभिलेख करने के लिए या सेवाओं के लिए उनकी आवश्यकता के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभागों को सतर्क करने के लिए किया जा सकता है।
चित्र (सन्दर्भ):
1. मुख्य चित्र में कोरोना के मरीजों को ट्रैक करने वाला ऐप्प दिखाई दे रहा है।
2. दूसरे चित्र में लोगों को ट्रैक करने का प्रतिबिम्ब बनाया है।
3. तीसरे चित्र में डाटा एनालिस्ट को दिखाया गया है।
संदर्भ :-
1. https://bit.ly/2zFmMsl
2. https://www.cbsnews.com/news/contact-tracing-jobs-covid/
3. https://techcrunch.com/2020/05/12/aarogya-setu-india-contact-tracing-app-10-crore/
4. https://bit.ly/2T0ScjS
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