मेरठ, क्या आप जानते हैं कि, वुडब्लॉक प्रिंटिंग (Woodblock printing) या काष्ठफलक मुद्रण क्या? है दरअसल, यह चित्रों और ग्रंथों को छापने के लिए उपयोग की जाने वाली सबसे प्रारंभिक तकनीक है, जिसकी शुरुआत चीन में तांग राजवंश के दौरान हुई थी। आज के इस लेख में, हम चीन में बनाए गए एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्रण नवाचार—मूवेबल टाइप प्रिंटिंग (चलायमान प्रकार छपाई)—के बारे में जानेंगे। बाद में, हम समझेंगे कि गुटेनबर्ग द्वारा प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार कैसे किया गया और इसने इतालवी पुनर्जागरण को कैसे बढ़ावा दिया। अंततः हम ‘गुटेनबर्ग बाइबिल’ के बारे में चर्चा करेंगे, जो प्रिंटिंग प्रेस का उपयोग करके मुद्रित शुरुआती प्रमुख पुस्तकों में से एक थी।
मूल रूप से, पूर्वी एशिया में प्राचीन मुद्रण की उत्पत्ति चीन में हुई थी। यह प्रणाली छठी शताब्दी के दौरान पत्थर पर खुदे लेखों से, कागज या कपड़े पर की जाने वाली स्याही की रगड़ (Ink rubbings) से विकसित हुई। कागज पर 'यांत्रिक वुडब्लॉक प्रिंटिंग' नामक छपाई का एक प्रकार, चीन में सातवीं शताब्दी में तांग राजवंश के दौरान शुरू हुआ था। वुडब्लॉक प्रिंटिंग का अभ्यास जल्द ही पूरे पूर्वी एशिया में फैल गया।
जैसा कि 1088 में शेन कुओ (Shen Kuo) ने अपने 'ड्रीम पूल एसेज' (Dream Pool Essays) में दर्ज किया है, चीनी कारीगर बी शेंग (Bi Sheng) ने मिट्टी और लकड़ी के टुकड़ों का उपयोग करके, चलायमान या चल प्रकार के एक प्रारंभिक मुद्रण यंत्र का आविष्कार किया। इन टुकड़ों को चीनी अक्षरों के लिए व्यवस्थित और संगठित किया गया था। चल धातु यंत्र के साथ मुद्रित सबसे पहला कागजी पैसा, जिस पर पैसे के पहचान कोड को छापा गया था, 1161 में सोंग राजवंश के दौरान बनाया गया था। 1193 में, एक पुस्तक ने तांबे के चल यंत्र का उपयोग करने के निर्देशों का दस्तावेजीकरण किया। धातु के चल प्रकार का उपयोग तेरहवीं शताब्दी तक गोर्यो काल (Goryeo period) के दौरान कोरिया तक फैल गया। इस तरह, दुनिया की सबसे पुरानी जीवित मुद्रित पुस्तक, जिसमें चल धातु यंत्र का उपयोग किया गया है, 1377 में कोरिया से है।
सत्रहवीं शताब्दी से उन्नीसवीं शताब्दी तक जापान में, 'उकियो-ए' (Ukiyo-e) नामक वुडब्लॉक प्रिंट का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया गया, जिसने यूरोपीय जैपोनिज्म (Japonisme) और प्रभाववादियों (Impressionists) को प्रभावित किया। प्रिंटिंग प्रेस सोलहवीं शताब्दी तक पूर्वी एशिया में ज्ञात हो गया था, लेकिन तब उसे अपनाया नहीं गया। सदियों बाद, कुछ यूरोपीय प्रभावों को मिलाकर यांत्रिक प्रिंटिंग प्रेसों को अपनाया गया, लेकिन फिर उन्हें बीसवीं और इक्कीसवीं शताब्दियों में डिजाइन की गई नई लेजर प्रिंटिंग प्रणालियों से बदल दिया गया।
वुडब्लॉक तकनीक में, लकड़ी के बोर्ड पर उकेरे गए अक्षरों पर स्याही लगाई जाती है, जिसे फिर कागज पर दबाया जाता है। चल यंत्र के साथ, छापे जाने वाले पृष्ठ के अनुसार अलग-अलग 'लेटरटाइप्स' का उपयोग करके बोर्ड को व्यवस्थित किया जाता है। पूर्व में आठवीं शताब्दी के बाद से लकड़ी की छपाई का उपयोग किया जाता था, और बारहवीं शताब्दी के दौरान धातु के चल यंत्र उपयोग में आया।
कागज पर वुडब्लॉक प्रिंटिंग का सबसे प्रारंभिक नमूना, 1974 में चीन के शीआन (Xi'an) की खुदाई में खोजा गया था। यह सन (Hemp) के कागज पर छपा एक 'धरणी सूत्र' है, और तांग राजवंश (618-907) के दौरान 650 से 670 ईस्वी का है। चीनी तांग राजवंश के शुरुआती दौर का एक और मुद्रित दस्तावेज़ भी मिला है। यह 'सद्धर्मपुण्डरीक सूत्र' या कमल सूत्र (Lotus Sutra)' है, जो 690 से 699 तक मुद्रित हुआ था। यह वू ज़ेटियन (Wu Zetian) के शासनकाल के साथ मेल खाता है, जिसके दौरान लंबे ‘सुखावतीव्यूह सूत्र' को चीनी भिक्षुओं द्वारा अनुवादित किया गया था। 658 से 663 तक, जुआनज़ैंग (Xuanzang) ने बौद्ध भक्तों को वितरित करने के लिए पुक्सियन पुसा (Puxian Pusa) की छवि की दस लाख प्रतियाँ छापीं थी।
पढ़ने के उद्देश्य से बनाए गए वुडब्लॉक प्रिंटों का सबसे पुराना विद्यमान प्रमाण, ‘कमल सूत्र' के अंश हैं, जो 1906 में तुरपन (Turpan) में खोजे गए थे। उन्हें वू ज़ेटियन के शासनकाल का बताया गया है। मुद्रण की एक विशिष्ट तिथि वाला सबसे पुराना पाठ 1907 में ऑरेल स्टीन (Aurel Stein) द्वारा डुनहुआंग (Dunhuang) की कुछ गुफाओं में खोजा गया था। 'डायमंड सूत्र' की यह प्रति 14 फीट (4.3 मीटर) लंबी है, और इसके आंतरिक छोर पर एक 'कोलोफॉन' (लेख) है। इसे दुनिया का सबसे पुराना सुरक्षित-दिनांकित वुडब्लॉक स्क्रॉल माना जाता है। डायमंड सूत्र के तुरंत बाद सबसे पुराना विद्यमान मुद्रित पंचांग, 'कियानफू सिनियन लिशु (Qianfu sinian lishu)' आया, जो 877 ईस्वी का है। जबकि, 932 से 955 तक 'ट्वेल्व क्लासिक्स (Twelve Classics)' और अन्य ग्रंथों का एक संग्रह मुद्रित किया गया था।
लगभग 1040 ईस्वी में, बी शेंग ने अलग-अलग, चलने योग्य अक्षरों और चिन्हों का उपयोग करके मुद्रण की एक विधि का आविष्कार किया, जिसे आज ‘मूवेबल टाइप प्रिंटिंग’ या चल मुद्रण तकनीक के रूप में जाना जाता है। वह मिट्टी के टुकड़ों पर उस चीनी अक्षर को उकेरते थे, जिसे वह बनाना चाहते थे। फिर वह उसे उच्च तापमान पर तब तक पकाते थे, जब तक कि वह कठोर न हो जाए।
दुर्भाग्य से, मिट्टी का टुकड़ा नाजुक होता है और उसके साथ काम करना कठिन होता है। बाद में, लगभग 1297 ईस्वी में, वांग झेंग (Wang Zhen) नामक एक युआन-राजवंश के अधिकारी ने मिट्टी के बजाय लकड़ी के यंत्र का उपयोग करके शेंग के डिजाइन में सुधार किया। 1490 ईस्वी तक, हुआ सुई (Hua Sui) ने कांस्य यंत्र के उपयोग का बीड़ा उठाया, जो लकड़ी के टाइप से भी अधिक टिकाऊ था। बी शेंग के ग्यारहवीं शताब्दी के मुद्रित ग्रंथों से पहले मुद्रित भी कुछ ग्रंथ हैं, जो चीनी चल यंत्र के उपयोग का सुझाव देते हैं, लेकिन यह अत्यधिक विवादास्पद है। लगभग वर्ष 1040 तक, चीन के सोंग-राजवंश के पास चल यंत्र के साथ मुद्रण के लिए आवश्यक तकनीक थी, जो पश्चिम में इस तकनीक की पुन: खोज होने से कम से कम चार सौ साल पहले की बात है।
प्राचीन मुद्रण यंत्रों के अलावा, आधुनिक मुद्रण तकनीक के आविष्कार का श्रेय जर्मनी में जोहानेस गुटेनबर्ग (Johaness Gutenberg) को जाता है। गुटेनबर्ग का प्रेस, कई खोजों और आविष्कारों का संयुक्त प्रयास था। प्रिंटिंग प्रेस को पारंपरिक 'स्क्रू प्रेस' (Screw press) के ओर बनाया गया था, जिसमें एक अतिरिक्त मैट्रिक्स जोड़ा गया था। इस पर व्यक्तिगत रूप से ढाले गए अक्षरों और प्रतीकों को वांछित टेक्स्ट बनाने के लिए व्यवस्थित किया जा सकता था। इस चल प्रकार डिजाइन ने टेक्स्ट के पृष्ठों को अक्षरों और प्रतीकों के पहले से ढाले गए चयन से, जल्दी से व्यवस्थित करने की अनुमति दी। जबकि, ब्लॉक प्रिंटिंग विधि में उन्हें लकड़ी के ब्लॉक से मेहनत से उकेरा जाता था। गुटेनबर्ग ने एक अद्वितीय तेल-आधारित स्याही भी बनाई थी, जो उनके धातु के यंत्र से प्रिंटिंग सबस्ट्रेट (कागज आदि) पर तत्कालीन अन्य मुद्रकों द्वारा उपयोग की जाने वाली जल-आधारित स्याही की तुलना में बहुत अधिक प्रभावी ढंग से स्थानांतरित होती थी। एक पृष्ठ छापने के लिए, गुटेनबर्ग मैट्रिक्स पर आवश्यक अक्षरों को व्यवस्थित करते थे, और उन पर अपनी स्याही का लेप लगाते थे। फिर मैट्रिक्स को संशोधित स्क्रू प्रेस के संपर्क छोर पर लगाया जाता था और तब तक नीचे किया जाता था, जब तक कि वह नीचे रखे कागज से न टकरा जाए। यह प्रक्रिया, हालांकि श्रम-साध्य थी, फिर भी इसने गुटेनबर्ग को ब्लॉक प्रिंटिंग विधि का उपयोग करने वाले या पांडुलिपि कार्य करने वाले मुद्रकों की तुलना में बहुत अधिक दर पर पृष्ठ छापने की अनुमति दी।
जोहानेस गुटेनबर्ग के चल यंत्र प्रेस ने पश्चिमी दुनिया में 'प्रिंटिंग क्रांति' की शुरुआत की, जो सूचना और सीखने के इतिहास में एक विशाल क्षण था। प्रिंटिंग प्रेसों तक पहुंच के साथ, वैज्ञानिक, दार्शनिक, राजनीतिज्ञ और धार्मिक अधिकारी अपने विचारों को जल्दी से दोहरा और प्रसारित कर सकते थे, और उन्हें अधिक दर्शकों के लिए उपलब्ध करा सकते थे।
गुटेनबर्ग द्वारा अपने प्रिंटिंग प्रेस के आविष्कार से लगभग एक सदी पहले, इतालवी पुनर्जागरण (Italian Renaissance) शुरू हुआ था। तब रोम और फ्लोरेंस जैसे इतालवी नगर-राज्यों में चौदहवीं शताब्दी के राजनीतिक नेताओं ने, प्राचीन रोमन शैक्षिक प्रणाली को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया था। प्रारंभिक पुनर्जागरण की मुख्य परियोजनाओं में से एक प्लाटो(Plato) और एरिस्टोटल(Aristotle) जैसे नायकों के लंबे समय से खोए हुए कार्यों को खोजना और उन्हें फिर से प्रकाशित करना था। धनी संरक्षकों ने अलग-थलग मठों की तलाश में आल्प्स(Alps) पर्वतों के पार महंगे अभियानों के लिए धन दिया। एक तरफ, इतालवी दूतों ने ओटोमन साम्राज्य (Ottoman Empire) में दुर्लभ ग्रंथों का लैटिन में अनुवाद और प्रतिलिपि बनाने के लिए, पर्याप्त प्राचीन ग्रीक और अरबी भाषा सीखने में वर्षों बिताए।
शास्त्रीय ग्रंथों को पुनः प्राप्त करने का अभियान प्रिंटिंग प्रेस से बहुत पहले से जारी था। लेकिन ग्रंथों को प्रकाशित करना सबसे अमीर लोगों के अलावा, किसी और के लिए बेहद धीमा और महंगा था। चौदहवीं शताब्दी में एक हाथ से लिखी गई किताब की कीमत एक घर जितनी होती थी, और पुस्तकालयों पर एक छोटी राशी खर्च होती थी।
1490 के दशक तक, जब वेनिस (Venice) यूरोप की पुस्तक-मुद्रण राजधानी थी, तब सिसरो (Cicero) के एक महान कार्य की मुद्रित प्रति की कीमत एक पाठशाला शिक्षक के केवल एक महीने के वेतन के बराबर थी। प्रिंटिंग प्रेस ने पुनर्जागरण की शुरुआत नहीं की, लेकिन इसने ज्ञान की पुन: खोज और साझाकरण को काफी तेज कर दिया।
गुटेनबर्ग से संबंधित एक अन्य महत्वपूर्ण वस्तु, उनके द्वारा मुद्रित गुटेनबर्ग बाइबिल (Gutenberg Bible) है। गुटेनबर्ग बाइबिल को 42-लाइन बाइबिल(42-line Bible), माज़ारिन बाइबिल(Mazarin Bible) या बी42(B42) के रूप में भी जाना जाता है। यह यूरोप में बड़े पैमाने पर उत्पादित धातु चल यंत्र का उपयोग करके मुद्रित की गई, सबसे प्रारंभिक प्रमुख पुस्तक थी। इसने "गुटेनबर्ग क्रांति" और पश्चिम में मुद्रित पुस्तकों के युग की शुरुआत की। इस पुस्तक को उसके उच्च सौंदर्य और कलात्मक गुणों और ऐतिहासिक महत्व के लिए मूल्यवान एवं सम्मानित माना जाता है।
संदर्भ
1. https://tinyurl.com/25msk786
2. https://tinyurl.com/566hat5r
3. https://tinyurl.com/kf6vwj7t
4. https://tinyurl.com/3byx82w8
5. https://tinyurl.com/y2s7vwbe