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बिजली वाहन (ई-वी) का बोलबाला

2017 में भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल, ई-वी (बिजली से चलने वाली गाड़ियाँ) को लेकर भविष्य के लिए एक नीति की घोषणा की थी। नीति के अनुसार सन 2030 से भारत में बिकने वाली हर गाड़ी ईंधन के रूप में बिजली का प्रयोग करेगी। इस नीति के प्रस्ताव का कारण था बढ़ता वायु प्रदूषण और प्राकृतिक ऊर्जा के स्रोतों (जिनका नवीकरण संभव नहीं है) में गिरावट। यदि 2030 तक भारत में चलने वाले सभी वाहन बिजली द्वारा चलने लगे तो भारत में हो रहे तेल आयत पर 20 लाख करोड़ रूपए की बचत की जा सकेगी और साथ ही साथ एक गीगाटन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन भी रोका जाएगा।

सरकार की इस नीति को नज़र में रखते हुए 2018 ऑटो एक्सपो में बिजली से चलने वाली गाड़ियों का बोलबाला रहा। महिंद्रा, टोयोटा, टाटा और मारुती सुज़ुकी जैसी धुरंधर कंपनियों के साथ साथ कई स्टार्टअप ने भी अपनी ई-वी गाड़ियाँ प्रस्तुत की। इनमें से कई गाड़ियाँ कंसेप्ट गाड़ियाँ थी जो अभी भी बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार नहीं हैं परन्तु कई गाड़ियाँ सड़कों पर उतरने के लिए भी तैयार हैं। आज भारत के कुल वाहनों में से ई-वी वाहन सिर्फ 1% हैं जिनमें से भी दुपहिया वाहन ही 95% हैं।

परन्तु सरकार की इस नीति पर मर्सडीज़ के चीफ एग्जीक्यूटिव, रोलैंड फोल्जर का मानना था कि यह एक जल्दबाज़ी में लिया गया फैसला था। उनके अनुसार यदि सरकार सिर्फ ई-वी गाड़ियों को बढ़ावा देगी तो कुछ समय में बाकी देश बिजली से भी बेहतर ईंधन जैसे हाइड्रोजन पर दौड़ रहे होंगे और भारत कभी उन दूसरे ऊर्जा स्रोतों की ओर अपना ध्यान केन्द्रित ही नहीं कर पाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि मान भी लें कि सभी गाड़ियाँ बिजली पर चलेंगी तो क्या इतनी बिजली उत्पादित करने के लिए ज़्यादा कोयला प्रयोग नहीं होगा? और यदि ऐसा हुआ तो जिस समस्या का निवारण करने के लिए इस नीति को लाया जा रहा है, वह समस्या तो पुनः जीवित हो जाएगी।

15 फरवरी को हुए एक पत्रकार सम्मलेन में सड़क परिवहन मंत्री, श्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत को फिलहाल ऐसी किसी नीति की आवश्यकता नहीं है। वहीँ नीति आयोग के सी.ई.ओ. श्री अमिताभ कान्त ने उनके समर्थन में कहा कि हमें अभी आवश्यकता है तो सिर्फ योजनाओं की क्योंकि रोज़ाना नई तकनीक बाज़ार में आ रही हैं। प्रौद्योगिकी हमेशा नियमों से आगे रहती है और भारत में नियमों को बदलना बहुत मुश्किल हो जाता है, इसलिए फिलहाल सिर्फ योजना करें। बेशक सरकार के इस फैसले से ई-वी पर काम करने वाली कम्पनियों और स्टार्टअप को थोड़ी कठिनाइयाँ झेलनी पड़ेंगी परन्तु जल्दबाज़ी में फैसला लेने से बेहतर सोच समझ कर कदम उठाना ही देश के हित में होगा।

प्रथम चित्र – मारुती सुज़ुकी ई-सर्वाइवर कंसेप्ट
द्वितीय चित्र – हौंडा स्पोर्ट्स ई-वी कंसेप्ट

1. https://auto.economictimes.indiatimes.com/news/passenger-vehicle/cars/plan-for-all-electric-cars-by-2030-not-viable-says-mercedes-chief/62232287
2. https://www.cartoq.com/electric-vehicle-ev-policy-not-needed-for-india-says-niti-aayog-ceo-amitabh-kant/

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